भारतीय संविधान में संशोधन पर विचार क्यों आवश्यक है? कारण, महत्व और प्रभाव
संविधान
में संशोधन पर विचार क्यों?
समय के साथ बदलती आवश्यकताओं तथा सामाजिक एवं
आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप संविधान में लचीलापन और कठोरता दोनों का संतुलन बनाए
रखने के लिए समय-समय पर संविधान में संशोधन की आवश्यकता होती है। यह संविधान को जीवंत
बनाए रखता है और वर्तमान समय की ज़रूरतों के अनुसार उसे प्रासंगिक बनाता है।
संविधान
में संशोधन की प्रक्रिया
भारतीय संविधान में संशोधन करने के तीन प्रकार
के तरीके हैं:
1.
संसद में साधारण बहुमत के आधार पर संशोधन
इस प्रकार के संशोधन को पारित करने के लिए
केवल संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत
पर्याप्त होता है।
उदाहरण:
- नए
राज्यों का निर्माण
- राज्यों
की सीमाओं एवं नामों में परिवर्तन
- राज्यों
में उच्च सदन (विधान परिषद) का सृजन या समाप्ति
- नागरिकता
की प्राप्ति और समाप्ति संबंधी प्रावधान
- उच्चतम
न्यायालय के क्षेत्राधिकार में परिवर्तन
2.
संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत के आधार पर संशोधन
- इस
प्रकार के संशोधन को पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में:
कुल सदस्यों के कम से कम 50% की सहमति
- उपस्थित
एवं मतदान करने वाले कम से कम 2/3 सदस्य के समर्थन की आवश्यकता होती है।
3.
विशेष
बहुमत और आधे राज्यों के समर्थन द्वारा संशोधन
भारतीय
संविधान को समय-समय पर बदलती आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार संशोधित किया गया
है। कुछ संशोधन ऐसे हैं जिन्हें संसद में विशेष बहुमत (2/3 बहुमत) के साथ-साथ देश के
आधे राज्यों के समर्थन की भी आवश्यकता होती है। ये संशोधन आमतौर पर उन विषयों से संबंधित
होते हैं जो केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन या संघीय ढांचे को प्रभावित करते हैं।
उदाहरण के लिए:
- राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया
- केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों
का वितरण
- संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व
संविधान में संशोधन: कब और
क्यों?
संविधान
एक गतिशील और जीवंत दस्तावेज है। यह एक जीवित व्यक्ति की तरह अनुभवों से सीखता है और
समय के साथ परिवर्तनों को आत्मसात करता है। संविधान को प्रासंगिक और व्यवहारिक बनाए
रखने के लिए समय-समय पर संशोधन आवश्यक होते हैं।
1951
से वर्तमान तक लगभग 106 संशोधन किए जा चुके हैं।
इन
संशोधनों का उद्देश्य बदलते सामाजिक, राजनीतिक, और आर्थिक परिवेश में उत्पन्न चुनौतियों
का समाधान करना रहा है।
भविष्य
की चुनौतियों से निपटने के लिए किए गए संशोधन:
|
संशोधन 1 |
18 जून
1951 |
1. भारत का प्रथम संविधान संशोधन था जिसमें
मौलिक अधिकारों वा संपत्ती कानूनों में बदलाव गई |
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संशोधन 2 |
संशोधन तो 1952 अधिनियम के नाम से जाना जाता
है लेकिन यह 1 मैं 1953 को लागू हुआ |
2. इसमें राज्यसभा या लोकसभा की सीटों के
पुनर्वितरण के प्रबंधन किए गए |
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संशोधन 3 |
22 फरवरी 1955 |
3.इसमें केंद्र सरकार को शिक्षक वास्तुओं
की कीमत और आपूर्ति नियंत्रण करने की शक्ति प्रदान की गई |
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संशोधन 4 |
27 अप्रैल 1955 |
4 .इसमें भूमि सुधार और संपदा अधिकार में
बदलाव किए गए |
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संशोधन 5 |
24 दिसंबर1955 |
5. संपदा अधिकार और न्याय समीक्षा से जुड़े
हुए थे |
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संशोधन 6 |
11 सितंबर 1956
|
6. इसमें राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत
राज्य सीमाओं में बदलाव किया |
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संशोधन 7 |
9 अक्टूबर 1956 |
7. इसमें संविधान की अनुसूचियां अपडेट की
गई |
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संशोधन 8 |
5 जनवरी 1960 |
8. इसमें 24 नई भाषाओं को आठवीं अनुसूचि
में समेकित किया गया |
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संशोधन 9 |
27
दिसंबर 1960 |
इसमें सरकारी नीति और भूमि सुधार से संबंधित
कुछ कानूनों को संरक्षण मिला |
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संशोधन 10 |
11 अगस्त 1961 |
राज्यों की विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण
और अन्य प्रावधानों में बदला हुए |
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संशोधन 11 |
19
दिसंबर 1961 |
भारत के कुछ राज्य विधानसभा के चुनाव प्रबंधन
में बदलाव |
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संशोधन 12 |
20
दिसंबर 1962 |
संसद और राज्य विधान सभा में सदासयता में
कुछ प्रवधानों में बदलाव |
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संशोधन 13 |
26 नवंबर 1962 |
इसमें राज्य और केंद्र सरकार के बिच वितीय
प्रवधानों में बदलाव किए गए |
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संशोधन 14 |
8 दिसंबर 1962 |
कुछ सरकारी कर्मचारियों को संविदा पर नियुक्तियों
में बदलाव किए गए |
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संशोधन 15 |
6 मई 1963 |
विशेष राज्य क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों
की नियुक्ति और प्रमोशन जैसे प्रवधानों में बदलाव |
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संशोधन 16 |
22 नवंबर 1963 |
संसद और राज्य विधानसभा के चुनाव प्रवधानों
में बदलाव |
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संशोधन 17 |
27 दिसंबर 1964 |
भूमि सुधार कानूनों को न्याय समीक्षा से
बचने के लिए संशोधन किया गया |
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संशोधन 18 |
10
मई 1966 |
राष्ट्रपति चुनाव संबंधित प्रावधानों में
बदलाव |
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संशोधन 19 |
5 अगस्त 1966 |
राष्ट्रपति के चुनाव और राज्यों के प्रतिनिधि |
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संशोधन 20 |
18
दिसंबर 1966 |
राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया और संसद के कुछ
सदस्यता प्रबंधन में बदलाव |
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संशोधन 21 |
11
अगस्त 1967 |
राज्य विधान सभा के सदस्य चुनाव और अन्य
सवालों से जुड़े प्रबंधन में बदलाव |
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संशोधन 22 |
31 अगस्त 1969 |
राज्य के पुनर्गणना और कुछ निर्वाचन प्रवधानों
में बदलाव |
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संशोधन 23 |
20 अगस्त 1970 |
राज्य के पुनर्गणना और चुनाव से संबंधित
कुछ प्रबंधन में बदलाव |
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संशोधन 24 |
5 अगस्त 1971 |
संसद को राज्यसभा सदनों की संख्या बढ़ाने
का अधिकार दिया गया |
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संशोधन 25 |
18 दिसंबर 1971 |
भूमि सुधार और समाजवादी नितियों को लागू
करने के लिए संशोधन किया गया |
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संशोधन 26 |
7 अप्रैल 1971 |
संसद को कुछ विशेष राज्यों के संविधान संबंध
अधिकार में बदलाव |
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संशोधन 27 |
1 मार्च 1971 |
संविधान में राज्यसभा सदस्य चुनाव और अन्य
प्रबंधन में बदलाव |
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संशोधन 28 |
5 अगस्त 1972 |
राज्य पुनर्गणना और राज्यसभा के चुनाव से
संबंधित प्रबंधन में बदलाव |
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संशोधन 29 |
30 अप्रैल 1972 |
राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया और कुछ अन्य निर्वाचन
प्रबंधन में बदलाव |
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संशोधन 30 |
2 दिसंबर 1972 |
कश्मीर के संवैधानिक अधिकार और चुनाव प्रक्रिया
से संबंधित प्रबंधन में बदलाव |
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संशोधन 31 |
17 अक्टूबर 1973 |
जिस्में सिक्किम राज्य को भारत में राज्य
का दरजा दिया गया |
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संशोधन 32 |
1 अप्रैल 1974 |
जिस्में सिक्किम राज्य को भारत में राज्य
का दरजा दिया गया |
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संशोधन 33 |
19 मई 1974 |
इसमें विधायक और सांसदों के इस्तीफे की प्रक्रिया
कठोर बनाया गया |
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संशोधन 34 |
7 सितंबर 1974 |
34. इसमें भूमि सुधार से जुड़े कानूनों को
9 अनुसुची में शामिल किया गया |
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संशोधन 35 |
1
मार्च 1975 |
. सिक्किम को भारतीय संघ का एक पूर्ण राज्य
बना या गया |
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संशोधन 36 |
26 अप्रैल 1975 |
36. सिक्किम को भारत का पूर्ण और वैधिक राज्य
बनाया गया |
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संशोधन 37 |
3
मई 1975 |
37. अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश
का दरजा दिया गया |
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संशोधन 38 |
1 अगस्त 1975 |
38. राष्ट्रपति राज्यपाल और आपातकालीन आदेशों
को न्याय समीक्षा से बहार किया गया |
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संशोधन 39 |
10 अगस्त 1975 |
39. प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति चुनाव को
न्याय समीक्षा से बहार किया गया |
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संशोधन 40 |
27
मई 1976 |
40. इसमें 9th अनुसुची में नए भूमि सुधार
कानून जोड़े गए और संपत्ती अधिग्रह सुविधाजनक बना |
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संशोधन 41 |
7 सितंबर 1976 |
41.राष्ट्रपति राष्ट्रपति राज्यों के प्रशासनिक
मामलों में संरक्षण की आयु सीमा बढ़िया गई |
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संशोधन 42 |
18 दिसंबर 1976 |
42. संविधान की प्रस्तावन मूल कार्तव्य और
नायक शक्तियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए |
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संशोधन 43 |
13 अप्रैल1978 |
43. 42 संशोधन द्वारा दी गई सरकार की अत्यधिक
शक्तियों को काम किया गया |
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संशोधन 44 |
6 सितंबर 1978 |
44. संपदा का अधिकार मौलिक अधिकारों से हटा
गया और आपटकालिन शक्तियां सिमित की गई |
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संशोधन 45 |
25 जनवरी 1980 |
45. अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण और
प्रतिनिधि की अवधी 10 वर्ष बधाई गई |
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संशोधन 46 |
2 फरवरी 1983 |
46. बिक्री दर के दयारे का विस्तार हुआ और
राज्य सरकारों को अधिक कराधन शक्तियां मिली |
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संशोधन 47 |
26 अगस्त 1984 |
47. भूमि सुधार से जुड़े काई राज्य कानूनों
को नवी अनुसुची में शामिल किया गया |
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संशोधन 48 |
1
अप्रैल 1985 |
48. नागालैंड में राष्ट्रपति शासन की अवधी
बढ़ाने के लिए संविधान के अनुछेद 356 में संशोधन किया गया |
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संशोधन 49 |
11 सितंबर 1984 |
49. त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों को छठी
अनुसुची के तह विशेष दरजा दिया गया |
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संशोधन 50 |
11 सितंबर 1984 |
50. सशस्त्र बलों के कर्मचारियों को भी सेवाओं
की कुछ श्रेणियों में आरक्षण का लाभ मिला |
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संशोधन 51 |
16 जून
1984 |
51. अरुणाचल प्रदेश को विशेष दरजा और विधानसभा
में आरक्षण देने के लिए हुआ |
|
संशोधन 52 |
1 मार्च 1985 |
52. दल बदल कानून और राजनीतिक स्थिरता सुनीश्चित
करने के लिए हुआ |
|
संशोधन 53 |
20 फरवरी 1986 |
53. मिजोरम को पूर्ण राज्य का दरजा देने
और विशेष प्रबंधन बनाएं |
|
संशोधन 54 |
1 अप्रैल 1986 |
54. राष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतन में
वृद्धि करने के लिए किया गया |
|
संशोधन 55 |
20 फरवरी 1987 |
55. अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दरजा
और विशेष प्रबंधन सुनीश्चित करने के लिए हुआ |
|
संशोधन 56 |
30
मई 1987 |
56. गोवा को पूर्ण राज्य का दरजा और दमन
और दीव को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के लिए |
|
संशोधन 57 |
21 सितंबर 1987 |
57.
अरुणाचल प्रदेश नागालैंड मिजोरम और मेघालय की जनता के लिए विधानसभा में आरक्षण रखने
हेतू हुआ |
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संशोधन 58 |
9
दिसंबर 1987 |
58. संविधान का हिंदी में अधिकार संस्कार
करने और शुद्धियों को सुधारने के लिए |
|
संशोधन 59 |
30 मार्च 1988 |
59.
पंजाब में आपातकाल लगाने की अवधि बढ़ाने और राष्ट्रपति शासन के नियमों को
सशक्त करने के लिए हुआ |
|
संशोधन 60 |
20
दिसंबर 1988 |
60 . लोक सभा और राज्य विधान सभा के चुनाव
में अधिक पतराता सीमा से जुड़े कर की दर बढ़ाने हेतू |
|
संशोधन 61 |
28 मार्च 1989 |
61. मतदान की न्यूनातम आयु 21 वर्ष से घटक
18 वर्ष करने के लिए |
|
संशोधन 62 |
20 दिसंबर 1989 |
62. अनुसूचित जाति अनुसूचित जाति और अंग्रेजी
भाषा अल्पसंख्याकों के लिए आरक्षण की अवधी 10 वर्ष बढ़ाने हेतु |
|
संशोधन 63 |
6 जनवरी 1990 |
63. संविधान के 59 संशोधन को संपूर्ण कर
पंजाब में आपातकाल की विशेष शक्तियां हटाने के लिए |
|
संशोधन 64 |
16 अप्रैल 1990 |
64. राष्ट्रपति शासन की अवधि नागालैंड में
6 महीने से बढ़कर 3 साल करने हेतू |
|
संशोधन 65 |
12 मार्च 1992 |
65. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति अवन अनुसूचित
जाति आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का प्रबंधन लागू हुआ |
|
संशोधन 66 |
7 जून 1990 |
66. शिक्षा संस्थानों में भूमिहीन लोगों
और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रवधानों को शामिल करने हेतू हुआ |
|
संशोधन 67 |
9 अक्टूबर 1990 |
67. राष्ट्रपति शासन की अवधि पंजाब में
6 महीने से बढ़कर 3 साल करने हेतू |
|
संशोधन 68 |
12 मार्च 1991 |
68. राष्ट्रपति शासन की अवधि पंजाब में
3 साल से बढ़कर 3.5 साल करने के लिए हुआ |
|
संशोधन 69 |
1 फरवरी 1992 |
69. दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
एनसीटी का दर्जा देने और एक विधानसभा स्थापना करने के लिए हुआ |
|
संशोधन 70 |
21 दिसंबर 1991 |
70. सिक्किम की लोकसभा और राज्यसभा में अन्य
केंद्र शासित प्रदेशों के समान प्रतिनिधि देने के लिए हुआ |
|
संशोधन 71 |
30 अगस्त 1992 |
71. चुनाव सुधार सुनिश्चित हुए |
|
संशोधन 72 |
5 दिसंबर 1992 |
72. त्रिपुरा विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों
के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी |
|
संशोधन 73 |
24 अप्रैल 1993 |
73. संविधान में एक नया भाग 9 जोड़ा गया
जिसका शीर्षक था पंचायत इसके अलावा संविधान में 11 विअनुसुची भी जोड़ी गई |
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संशोधन 74 |
1 जून 1993 |
74. नगर पालिका को संवैधानिक दर्जा दिया
गया और उनके संविधान के भाग 9 का में शामिल किया गया |
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संशोधन 75 |
15 मई 1994 |
75. इस संशोधन में धारा 323 B संशोधन की
गई थी |
|
संशोधन 76 |
31 अगस्त 1994 |
76. संविधान में अनुसूची 9 संशोधन की गई |
|
संशोधन 77 |
17 जून
1995 |
77. इस संशोधन में अनुछेद 16 की धारा 4 के
बाद धारा 4 A जोड़ी गई थी |
|
संशोधन 78 |
30
अगस्त 1995 |
78. संविधान की आठवीं अनुसूची में भूमि सुधार
से जुड़े कानूनों को शामिल किया गया था |
|
संशोधन 79 |
25 जनवरी 2000 |
79. संविधान की धारा 334 में बदलाव |
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संशोधन 80 |
9 जून
2000 |
80. संघ और राज्यों के बीच करो के बंटवारे
के लिए राजस्व के हस्तांतरण की एक वैकप्लिक योजना लागू की गई |
|
संशोधन 81 |
9 जून
2000 |
81. अनुछेद 16 में संशोधन किया गया |
|
संशोधन 82 |
8 सितंबर 2000 |
82. अनुछेद 335 में बदलाव किया गया |
|
संशोधन 83 |
8 सितंबर 2000 |
83. अनुछेद 243 M में संशोधन किया जिससे
अरुणाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति के लिए पंचायतों में आरक्षण की आवश्यकता नहीं
l रही अरुणाचल प्रदेश की पूरी आबादी जनजाती है l |
|
संशोधन 84 |
21 फरवरी 2002 |
84. संशोधित धारा 55 ,81, 82, 170, 330,
332 |
|
संशोधन 85 |
4 जनवरी 2002 |
85. संशोधित धारा 16 |
|
संशोधन 86 |
12
दिसंबर 2002 |
86. संशोधन धारा 45 और 51 A जोड़ा धारा
21A. |
|
संशोधन 87 |
22 जून 2003 |
87. लोकसभा और राज्यसभा के लिए चुनाव क्षेत्रों
को 2001 की जनगणना के आधार पर तय किया गया |
|
संशोधन 88 |
15 जनवरी 2004 |
88. इस संशोधन के तहत संविधान में एक नया
अनुछेद 268 आ जोड़ा गया था |
|
संशोधन 89 |
28 सितंबर 2003 |
89. संशोधित धारा 338 जोड़ा गया धारा
338A |
|
संशोधन 90 |
28 सितंबर 2003 |
90 . संशोधित धारा 332 |
|
संशोधन 91 |
1 जनवरी 2004 |
91.संशोधन धारा 75 और 164 धारा जोड़ा गया
धारा 361 B संशोधित किया गया अनुसुची 10. |
|
संशोधन 92 |
8 जनवरी 2004 |
92. संशोधित अनुसूची 8 |
|
संशोधन 93 |
20 जनवरी 2006 |
93.
शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था की गई |
|
संशोधन 94 |
12 जून 2006 |
94. छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्यों में आदिवासी
कल्याण के लिए मंत्री की नियुक्ति का प्रबंधन |
|
संशोधन 95 |
25 जनवरी 1010 |
95. संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन
किए गए |
|
संशोधन 96 |
23 सितंबर 2011 |
96. संविधान की अनुसूचि 8 में बदलाव किए
गए l |
|
संशोधन 97 |
2011 |
97. यह संशोधन सहकारी समितियों को संवैधानिक
दर्जा और संरक्षण देने के लिए किया गया था इस संशोधन के जरी संविधान में भाग 9 बी
जोड़ा गया था |
|
संशोधन 98 |
1 जनवरी 2013 |
98. कर्नाटक के हैदराबाद के लिए एक अलग विकास
बोर्ड बनाया गया |
|
संशोधन 99 |
13 अप्रैल 2015 |
99. राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन किया
गया था हलांकी सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में इसेअसंवैधानिक करार दिया था |
|
संशोधन 100 |
2015 |
100. यह संशोधन भारत और बांग्लादेश के बिच
हुए भू सीमा समझौते को लागू करने के लिए किया गया था |
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संशोधन 101 |
1 जुलाई 2017 |
101. देश में वास्तु अवन सेवा कर (GST
) लागू किया गया था |
|
संशोधन 102 |
11 अगस्त 2018 |
102. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक
दरजा मिला |
|
संशोधन 103 |
14 जनवरी 2019 |
103. सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर
वर्ग (EWS) के लिए सरकारी नौकरी और शैक्षिक संस्थान में 10% आरक्षण की व्यवस्था की
गई l इसका मुख्य उद्देश्य विधानमंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है. |
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संशोधन 104 |
21 जनवरी 2020 |
104. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों
के लिए आरक्षण की अवधी बढ़ाने और एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित सीटों को हटाने
से जुड़ा है |
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संशोधन 105 |
15 अगस्त 2021 |
105. इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक और शैक्षिक
रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) की पहचान करने की राज्य सरकारों की शक्ति को बहाल करना
था। |
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संशोधन 106 |
सितंबर
2023 |
106. महिला आरक्षण अधिनियम महिला के लिए
लोकसभा और राज्यसभा विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित इसका मुख्य
उद्देश्य विधानमंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है. |
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